'बेशर्ममेव जयते' की नाट्य प्रस्तुति ने भ्रष्टाचार को किया बेनकाब।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, जवाहर कला केंद्र, क्युरियो जयपुर द्वारा खेला समारोह के चौथे दिन रंगायन में भोपाल के तरुण दत्त पांडेय के निर्देशन में व्यंग्य नाटक बेशर्ममेव जयते का मंचन हुआ जो राजस्थान के वरिष्ठ नाट्य निर्देशक स्व. एस वासुदेव सिंह को समर्पित रहा। 
फिल्म अभिनेता और रंगकर्मी नरेंद्र गुप्ता जी ने नाट्यनिर्देशक स्व. वासुदेव सिंह के व्यक्तित्व कृतित्व पर प्रकाश डाला। यह नाट्य प्रस्तुति बेशर्ममेवजयते वरिष्ठ व्यंग्यकार डाॅ. प्रेमजनमेजय की व्यंग्य कृति है जिसमे समाज मे फैली कुरीतियों, अराजकता, भ्रष्टाचार एवं व्यभिचार को प्रदर्शित किया गया है।
'बेशर्ममेवजयते तीन कहानियों ‘ये जो टेंशन है‘, ‘मक्खी‘ एवं ‘जाना है पुलिस वालों के यहाँ बारात में‘ का कोलाज है। प्रत्येक कहानी में दिखाया गया है कि समाज का हर वर्ग सब ओढ़ कर भी निर्वस्त्र घूम रहा है और यह आक्षेप लगा रहा है कि जो उसे देख रहा है वह बेशर्म है। गांधी जी के तीन आदर्श बुरा मत देखो सुनो कहो की जगह बुरा ही देख सुन और कह रहा है। उसने सत्यमेव जयते के मायने बदल दिए हैं। गर्व से कह रहा है बेशर्ममेवजयते। इसे मंचित करने वाले कलाकारों योगेश कुमार उमाठे, अपूर्व दत्त मिश्रा, रमेश अहिरे, आशीष ओझा, सक्षम अहिरे, सुनीता अहिरे ने देश में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनाचार, व्यभिचार को बेनकाब करके रख दिया। इस नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन नव नाट्य संस्था भोपाल के तरूण पाण्डेय के कुशल निर्देशन ने श्रोताओं को बार-बार करतल ध्वनि के लिए विवश कर दिया। इस अवसार पर राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रमेश बोराणा मुख्य अतिथि, मुख्यमंत्री के ओएसडी फारूक आफरीदी और राष्ट्र भाषा प्रचार समिति के अध्यक्ष अखिल मिश्रा विशिष्ट अतिथि थे।

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