राज्य में तीव्र औद्योगिक विकास के लिए तकनीकी दक्षता को बढ़ावा देना जरूरी।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजस्थान एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन राजीव अरोड़ा ने कहा कि प्रदेश में तीव्र औद्योगिक विकास के लिए तकनीकी दक्षता की खासी जरूरत है। उन्होंने उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार मैनपावर तैयार करने पर जोर दिया। अरोड़ा ने उद्योग भवन में डिस्मैक कम्पीटेन्सी सविसेस प्राइवेट लिमिटेड (डीसीएस) का प्रस्तुतिकरण देखने के बाद यह बात कही। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल, ज्वेलरी, हैंडीक्राफ्ट और ब्लू पॉटरी जैसे क्षेत्रों में सेक्टर स्पेसिफिक कामगार तैयार करने होंगे। अरोड़ा ने बताया कि डीसीएस राजस्थान के उद्योगों को विश्वस्तरीय नवीनतम तकनीकी उपलब्ध करवाने एवं इस तकनीकी पर कार्य करने के लिए कुशल इंजीनियर, कामगार एवं तकनीशियन तैयार करने के लिए सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स बनाने के प्रस्ताव दिए हैं। इसमें स्थापना के ये प्रस्ताव विश्व की नामी तकनीकी हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर तथा तीन वर्ष के संचालन एवं रख रखाव की सम्पूर्ण सेवाएं डीसीएस के माध्यम से दी जानी है। राजस्थान एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल चेयरमैन ने बताया कि प्रत्येक सेन्ट्रल ऑफ एन्सीलेन्स की सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर की कुल लागत 150 करोड रूपये है जिसमें राज्य सरकार द्वारा केवल 20 प्रतिशत यानी 30 करोड रूपये प्रति सेन्टर का ही भुगतान किया जाना है। इन केन्द्रो के लिए भवन एवं अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाऐं राज्य सरकार द्वारा देय होगी। इनका तीन वर्ष का संचालन एवं अनुरक्षक डीसीएस ही करेगा। उन्होंने बताया कि समस्त परिसम्पत्तियां प्रारम्भ से ही राज्य सरकार की होगी जिन पर अन्य कम्पनी का कोई अधिकार नहीं होगा। ये केन्द्र जोधपुर, जयपुर, अलवर, बानसूर एवं बाडमेर में स्थापित होने की योजना है। प्रस्तुतिकरण के दौरान डीसीएस के अधिकारियों के अलावा संयुक्त निदेशक पीआर शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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