पोक्सो अधिनियम अपराध के तहत नाबालिग बच्ची की रजामंदी कोई बचाव नहीं - संदीप कौर।

हनुमानगढ़-विश्वास कुमार।
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा), जयपुर द्वारा सम्पूर्ण प्रदेश में  पोक्सो अधिनियम के पीड़ित बच्चों को विधिक सहायता उपलब्ध करवाने हेतु महाभियान, बाल विवाह प्रतिषेध अभियान प्रारम्भ किये गये है जिसके प्रचार प्रसार हेतु सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संदीप कौर द्वारा व्यापार मण्डल पब्लिक सीनियर सैकेण्डरी स्कूल व केजी पब्लिक सीनियर सैकेण्डरी स्कूल में विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। शिविर में सचिव संदीप कौर द्वारा उपस्थित विद्यार्थियों को पोक्सो अधिनियम से अवगत करवाते हुए बताया गया कि इस अधिनियम के तहत अपराधों को तीन वर्गों में विभाजित कर सकते हैं। स्पर्श सहित अपराध, स्पर्श रहित अपराध, अन्य अपराध। पोक्सो अपराध के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बालक व बालिकाओं की रजामंदी का औचित्य नहीं होता तथा अपराध कारित करने वाला यदि इस प्रकार का कोई बचाव अपने पक्ष में पेश करता भी है तो वह मान्य नहीं होता है। बालकों को इन अपराधों से बचाने के लिए हमें उन्हें असुरक्षित स्पर्श के बारे में समझाना चाहिए, ताकि यदि ऐसा कभी उनके साथ घटित हो तो वे सीधे अपने परिजनों को बता सकें। किसी भी व्यक्ति को बालकों से संबंधित किसी अपराध घटित होने की सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस या चाईल्ड हैल्पलाईन नंबर 1098 सूचना देना चाहिए। इसके साथ ही अवगत करवाया गया कि पोक्सो अपराध से पीड़ित को किस प्रकार निःशुल्क विधिक सहायता दी जाती है, पोक्सो पीड़ित को मिलने वाली राजस्थान पीड़ित प्रतिकर स्कीम के बारे में भी जानकारी दी गई। इसके साथ-साथ नालसा (बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाऐं और उनके संरक्षण के लिए विधिक सेवाऐं) योजना, 2015 के बारे में अवगत करवाया गया तथा बाल विवाह प्रतिषेध अभियान से अवगत करवाते हुए बाल विवाह के दुष्परिणामों, बाल विवाह करने की सजा के प्रावधानों, जुर्माना से अवगत करवाते हुए सभी विद्यार्थियों को बाल विवाह की सूचना मिलने पर अपने नजदीकी न्यायालय, पुलिस थाना, प्राधिकरण को सूचित करने हेतु प्रेरित किया गया एवं बाल विवाह प्रतिषेध के सम्बन्ध में शपथ भी दिलाई गई।

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