भारत जोड़ो यात्रा के मार्ग को लेकर स्थिति साफ, बड़ी छोटी सभाएं करेगें राहुल गांधी।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के मार्ग को लेकर स्थिति पूर्णतया स्पष्ट हो गई है। भारत जोड़ो यात्रा अपने पूर्व निर्धारित क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी की यात्रा का रूट जैसा तय था वैसा ही रहेगा। हालांकि जरुरत पड़ने पर कुछ हल्का बदलाव देखने को मिल सकता है। भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान के 7 जिलों की 18 विधानसभा सीटों से गुजरेगी। सबसे ज्यादा 4-4 सीटें कोटा, दौसा और अलवर जिले की होंगी। इसके अलावा सवाईमाधोपुर की 3 और झालावाड़, बूंदी और टोंक जिले की 1-1 विधानसभा सीट शामिल है।
राहुल गांधी की यात्रा सबसे पहले झालरापाटन विधानसभा से राजस्थान में प्रवेश करेगी। इसके बाद यह रामगंज मंडी और लाडपुरा विधानसभा होते हुए कोटा शहर में प्रवेश करेगी। यहां से यह कोटा उत्तर और दक्षिण दोनों विधानसभाओं से गुजरते हुए केशवरायपाटन विधानसभा पहुंचेगी। इसके बाद देवली-उनियारा और फिर खंडार विधानसभा पहुंचेगी। इसके बाद यात्रा आगे बढ़कर सवाई माधोपुर विधानसभा होते हुए बामनवास और फिर लालसोट पहुंचेगी। यहां से यात्रा आगे बढ़कर दौसा, सिकराय विधानसभा होते हुए बांदीकूई पहुंचेगी। यहां से यात्रा अलवर जिले में प्रवेश कर राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ विधानसभा होते हुए अलवर शहर और ग्रामीण विधानसभाओं में जाएगी।इसके बाद अलवर की रामगढ़ विधानसभा होते हुए यात्रा हरियाणा चली जाएगी। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कोटा, दौसा और अलवर में राहुल गांधी की बड़ी सभा हो सकती है। हालांकि यात्रा के दौरान कई जगहों पर छोटी सभाएं राहुल गांधी की होगी। राहुल की यात्रा के 3 दिसम्बर को राजस्थान में प्रवेश करने का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं 20 दिसम्बर तक यात्रा के राजस्थान से निकलने की संभावना है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के कार्यक्रम अनुसार देखा जाए तो 18 में से 12 विधानसभा क्षेत्र पर पर कांग्रेस विधायक जीते हुए हैं। वहीं 6 सीटों पर  भाजपा के विधायक है। राहुल की यात्रा जिन क्षेत्रों से राजस्थान में प्रवेश करेगी इनमें झालरापाटन, रामगंज मंडी, लाडपुरा, कोटा दक्षिण, केशवरायपाटन और अलवर शहर में भाजपा के विधायक है। इसके अलावा बाकी सभी सीटों पर कांग्रेस के विधायक है। राहुल की यात्रा के रूट से जुड़ा ज्यादातर क्षेत्र गुर्जर और मीणा बाहुल्य है। सिर्फ कोटा उत्तर और अलवर शहर सीट को छोड़ दिया जाए तो अन्य सभी सीटों पर गुर्जर-मीणा समाज प्रभावी है। ये सीटें या तो गुर्जर या मीणा बाहुल्य है या फिर दोनों समुदाय मिलकर निर्णायक भूमिका में हैं। कांग्रेस के नजरिए से देखा जाए तो इस पूरे क्षेत्र के बड़े हिस्से में खासकर सवाईमाधोपुर, बूंदी, दौसा, टोंक और अलवर जिले में सचिन पायलट का काफी प्रभाव है। यही वजह है कि सीएम गहलोत और उसके समर्थक इस मार्ग को परिवर्तन कराने की पुरजोर कोशिश में लगे हुए थे। ऐसे में अब लग रहा है कि प्रभारी अजय माकन की नाराजगी भारत जोड़ो यात्रा आने से पहले समाप्त हो जाएगी और भी फिर से सक्रिय होकर अपना काम का संभाल लेंगे।

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