राजीविका के माध्यम से महिलाएं स्वरोजगार पाकर बने आत्मनिर्भर।

जैसलमेर-मनीष व्यास।
जिला प्रभारी सचिव एवं शासन सचिव ग्रामीण विकास एवं निदेशक राजीविका मंजू राजपाल (आईएएस) ने राजीविका से जुड़ी सीएलएफ एवं अन्य पदाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे राजीविका के माध्यम से अधिक से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएं एवं उन्हें समूहों के माध्यम से रोजगार परख उत्पादों से जोड़कर गतिविधियां संचालित करवाना सुनिश्ति करें ताकि महिलाएं स्वयं धन अर्जन कर आर्थिक रूप से सम्बल बन सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए राजस्थान महिला निधि बैंक की स्थापना की है, जिसके माध्यम से भी राजीविका के स्वयं सहायता समूहों को सहयोग प्रदान किया जाता है। निदेशक राजपाल जिला कलक्ट्री सभाकक्ष में संकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ) के एक दिवसीय आमुखीकरण कार्यशाला में महिलाओं को सम्बोधित करते हुए यह उद्गार व्यक्त किए। कार्यशाला में जिला कलक्टर टीना डाबी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी दाताराम, स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर राजीविका प्रीति सिंह, विकास अधिकारी पंचायत समिति जैसलमेर जितेन्द्र सांधु, लीड बैंक अधिकारी सी.एस. गर्ग के साथ ही राजीविका के सीएलएफ एवं अन्य कार्मिक उपस्थित थे। 
सभी स्वयं सहायता समूहों के बैंकों में खाते खोलें।
निदेशक ने जिले में राजीविका मिशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि यहां अभी तक जो स्वयं सहायता समूह गठित हुए है उनमें से अधिकांश के बैंकों में खाते नहीं खुले है जो चिन्तनीय हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि विशेष प्रयास कर शत्-प्रतिशत समूहों के खाते खुलवावें ताकि उन्हें रिवोल्विंग फण्ड मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने सीएलएफ के पदाधिकारी महिलाओं से कहा कि जो समूह सक्रिय है, वे बैंकों से ऋण लेकर अपना स्वयं का स्वरोजगार प्राप्त करें एवं समय पर बैंकों में ऋण जमा कराएं। उन्होंने कहा कि राजीविका का मुख्य उद्देश्य महिलाओं में बचत की आदत डालकर स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उनकों हर स्तर पर मदद करने के लिए तैयार है। 
राजीविका के 5 सूत्रों का पालन कर समूहों का बेहतर संचालन करें।
उन्होंने महिलाओं को राजीविका के 5 सूत्रों की पालना करते हुए स्वयं सहायता समूहों का गठन अधिक से अधिक संख्या में कराने एवं इन सूत्रों की पालना करने पर बल दिया। उन्होंने जिला प्रशासन एवं ग्रामीण विकास व पंचायतीराज को कहा कि वे ऐसे स्वयं सहायता समूह जिनके अभी तक बैंकों में खाता नहीं खुल है, उनके लीड बैंक अधिकारी के माध्यम से बैंकों को पाबंद कर खाता खुलवाने की कार्यवाही करे। उन्होंने कृषि के साथ ही पशुपालन एवं अन्य गैर कृषि गतिविधियों का भी संचालन समूहों के माध्यम से कराने पर विशेष जोर दिया ताकि ये समूह रोजगार के हिसाब से आगे बढ़े। उन्होंने दीदी रसोई के नाम से ब्लॉक स्तर पर पंचायत समिति कार्यालयों एवं जिला कार्यालयों में राजीविका के समूहों से संचालित करने की भी सलाह दी ताकि उन्हें रोजगार के लिए प्लेटफॉर्म मिले। उन्होंने ब्लॉक कॉर्डिनेटर एवं आरपी को निर्देश दिए कि वे विशेष प्रयास कर गठित स्वयं सहायता समूहों के खाते बैंकों में शीघ्र ही खुलवावे। उन्होंने सीएलएफ से स्वयं सहायता समूहों के संचालन के सम्बन्ध में आ रही समस्याओं की भी पूरी जानकारी ली एवं विश्वास दिलाया कि उन्हें हर सम्भव सहयोग किया जायेगा।
प्रगति लाने का दिलाया विश्वास।
जिला कलक्टर टीना डाबी ने निदेशक राजीविका को विश्वास दिलाया कि लीड बैंक अधिकारी के साथ बैठक लेकर राजीविका के स्वयं सहायता समूहों के बैंकों में खाते खुलवाएंगे एवं उन्हें क्रेडिट लिंकेज करवाएंगे। उन्होंने आगामी माह तक राजीविका मिशन की गतिविधियों में प्रगति लाने के लिए विशेष कार्य करने की भी आवश्यकता जताई एवं कहा कि इसमें पंचायतीराज के अधिकारियों का पूरा सहयोग लेगे। 
प्रगति की दी जानकारी।
स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर प्रीति सिंह ने पावर पॉईन्ट प्रजेन्टेशन के माध्यम से जिले में राजीविका के माध्यम से संचालित गतिविधियों के साथ ही गठित स्वयं सहायता समूहों, समूहों के बैंकों में खोले गए खाते एवं अन्य गतिविधियों से स्वयं सहायता समूहों को क्रियाशील बनाने के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने जिले का प्रतिशत सुधाने के लिए विशेष आवश्यकता जताई। बैठक में गोल्डन सिटी सीएलएफ शहरी आजीविका केन्द्र विनिता जैन ने गठित समूहों एवं उनके द्वारा की जा रही गतिविधियों की जानकारी दी एवं बताया कि इसके माध्यम से 11 लाख 62 हजार 365 रुपये का स्वरोजगार उपलब्ध करवाया गया। इसके साथ ही उजास संस्था के कॉडिनेटर दिलीप सिंह सोढ़ा ने संस्था द्वारा की जा रही गतिविधियों की जानकारी दी।

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