10 वर्षों बाद पाली की धरा पर मानवता के मसीहा महाश्रमण का पावन पदार्पण।

पाली-मनोज शर्मा।
आस्था, उत्साह, उल्लास और उमंग का वातावरण। मानवता के मसीहा के दर्शन के लिए, उनके मंगल स्वागत-अभिनंदन के लिए तत्पर सकल मानव समाज। जहां न किसी जाति का भेद न ही पंथ की रुकावट और ना ही किसी प्रकार का वैर-विरोध। सबका एक ही लक्ष्य मानवीय मूल्यों की स्थापना के लिए गतिमान जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता, महामानव आचार्यश्री महाश्रमणजी का अपनी नगरी में भव्य स्वागत करना। यह आस्थासिक्त मनोभाव पाली के जन-जन में स्पष्ट नजर आ रही थी। हजारों-हजारों नेत्र उस ओर टकटकी लगाए हुए थे, जिस ओर से शांतिदूत आचार्य महाश्रमणजी के मंगल पदार्पण की संभावना थी।
मानव-मानव का कल्याण करने के लिए गतिमान महातपस्वी, शांतिदूत, युगप्रधान आचार्य महाश्रमणजी ने गुरुवार को प्रातः हेमावास से पाली नगर की मंगल प्रस्थान किया। पाली के उत्साही श्रद्धालु हेमावास से ही अपने आराध्य के चरणों का अनुगमन करने लगे। आचार्य जैसे-जैसे पाली नगर के निकट पधार रहे थे, श्रद्धालुओं का उत्साह और उल्लास बढ़ता जा रहा था। लगभग दस वर्षों बाद पाली में आचार्य महाश्रमणजी का शुभागमन हो रहा था। आचार्य जैसे ही पाली नगर की सीमा में पधारे तो आस्थासिक्त श्रद्धालुओं के विशाल जनसैलाब ने महातपस्वी महाश्रमण का भव्य अभिनन्दन किया। कई प्रकार के मंगल वाद्य यंत्रों की स्वर लहरियां, श्रद्धालुजनों के बुलंद जयघोष, पूरे बाजार में स्थान-स्थान पर लगे बैनर, तोरण द्वार श्रद्धालुओं की आस्था, उल्लास को मानों प्रदर्शित कर रहे थे। भव्य एवं विशाल जुलूस जब मानवता के मसीहा का अभिनंदन करते हुए गतिमान हुआ तो पाली की चौड़ी सड़क भी मानों इस आस्था की लहर में डुबी हुई-सी नजर आ रही थी।आचार्य श्रद्धालुओं पर अपने दोनों करकमलों से आशीषवृष्टि करते हुए पाली के वर्तमान एसपी गगनदीप सिंगला व डीएम नमित मेहता के आवास पर भी पधारे। आचार्य का स्वागत कर जिले के एसपी सिंगला भी स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे थे। आचार्य के अभिनन्दन में पाली का सकल समाज उपस्थित था। स्थानीय विधायक सहित अनेक गणमान्यों ने भी आचार्य का भावभीना अभिनन्दन किया। भव्य स्वागत जुलूस और झांकियों के साथ कुल लगभग छह किलोमीटर का विहार कर आचार्य पाली जिला मुख्यालय स्थित धर्णेन्द्र-पद्मावती नगर में स्थित मरलेचा परिवार के निवास स्थान में पधारे।अणुव्रत नगर में बने भव्य एवं विशाल ‘भिक्षु समवसरण’ भी जनता की विराट उपस्थिति से पूरी तरह जनाकीर्ण बना हुआ था, ऐसा लग रहा था मानों आचार्यश्री के चतुर्मास का प्रवचन पण्डाल हो। कार्यक्रम का शुभारम्भ आचार्य के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने जनता को सत्संगति के लाभ बताए। युगप्रधान आचार्य महाश्रमणजी ने उपस्थित विराट जनसमूह को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि हमारी दुनिया में मित्र भी बनाए जाते हैं, किन्तु शास्त्रों में स्वयं की आत्मा की स्वयं की सबसे अच्छी मित्र और सबसे बड़ी शत्रु भी बताई गई है। सुप्रवृत्ति में प्रतिष्ठित आत्मा स्वयं की मित्र और दुष्प्रवृत्ति में संलग्न आत्मा स्वयं की शत्रु के समान होती है। अहिंसा की चेतना से भावित आत्मा मित्र और हिंसा से जुड़ी हुई आत्मा शत्रु के समान होती है। आदमी को अपनी आत्मा को मित्र बनाने का प्रयास करना चाहिए। आचार्य ने आगे कहा कि आज पाली में आना हुआ है। यह पाली पावन धरा है, जहां पूर्वाचार्यों ने 21 चतुर्मास किए हैं। इस प्रकार पाली पूवाचार्यों की चतुर्मास भूमि है। मैं इससे पहले पाली में सन् 2012 में आया था। पाली की जनता धर्म से भावित रहे, उनके चित्त में समाधि रहे, जनता का मानस सरस बना रहे, मंगलकामना। आचार्य की प्रेरणा से उपस्थित विशाल जनमेदिनी ने स्वयं के आत्मकल्याण के लिए श्रीमुख से सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति के संकल्पों को स्वीकार किया। भव्य विशाल प्रवचन पंडाल में सात दिनों पूर्व सिरियारी में सात नवदीक्षित चारित्रात्माओं को बड़ी दीक्षा (छेदोपस्थापनीय चारित्र) में आर्षवाणी का समुच्चारण करते हुए स्थापित किया तथा नवदीक्षित साधु-साध्वियों को उत्प्रेरित किया। आचार्य के स्वागत में पाली तेरापंथी सभा के अध्यक्ष  सुरेन्द्र सालेचा ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। स्थानीय विधायक ज्ञानचंद पारख ने कहा कि गुरुदेव! अपनी 62 वर्ष की अवस्था में पाली में ऐसा दृश्य नहीं देखा था। यह आपकी तपस्या का प्रभाव है, जिसके कारण पूरी पाली की जनता आपके दर्शनों के लिए उमड़ पड़ी। वैश्विक संकट की घड़ी में आप जैसे संतों की कल्याणकारी वाणी की परम आवश्यकता है। आपका आशीर्वाद हम सभी को निरंतर मिलता रहे।

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