कंगारू ने बात सिखाई, तुझे बचाए तेरी माई - डॉ. रामावतार शर्मा

किसी भी परिवार में यदि कोई बालक समय से पहले जन्म लेता है या फिर उसका जन्म के समय का वजन बहुत कम हो तो उस परिवार की सांसे अटक सी जाती हैं। मोटे आंकड़ों के अनुसार पूरे विश्व में हर साल कोई 1.5 करोड़ बच्चे 37 सप्ताह से पहले की गर्भावस्था में ही जन्म ले लेते हैं। इसे समय पूर्व का जन्म या प्रीमेच्योर बर्थ कहा जाता है। ये सब बच्चे कम परिपक्व होते हैं इसलिए कम वजन ( 2.5 किलोग्राम से कम ) के भी होते हैं। इनके अलावा कुछ मैच्योर बच्चे भी कम वजन के साथ जन्म लेते हैं।

विश्व में पांच साल की उम्र के पहले जितने भी बच्चों की मृत्यु होती है उनमें से 45 प्रतिशत नवजात शिशु होते हैं और इन नवजात शिशुओं में 65 प्रतिशत समय पूर्व जन्मे और 2.5 किलो से कम वजन वाले शिशु होते हैं। यही कारण है कि प्रीमेच्योर बर्थ एक परिवार के हर सदस्य की धड़कन बढ़ा देती है क्योंकि कोई भी व्यक्ति इस नवजात के जीवित रहने की संभावनाओं को लेकर निश्चित नहीं होता है।

ऐसे नवजात शिशु की मृत्यु का बड़ा कारण शरीर के तापमान का गिरना, ऊर्जा की कमी और कोई बैक्टेरिया द्वारा संक्रमण होना होता है। अभी तक शिशु एवम् नवजात बालक विशेषज्ञ ऐसे नवजात को नर्सरी आई सी यू में भर्ती कर देते हैं। जन्म लेने के साथ ही बच्चा मां से दूर हो जाता है। उसे तीन से सात दिन तक एक इनक्यूबेटर या वार्मर में रखा जाता है ताकि उसके शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखा जाए।

आई सी यू सेवाएं काफी महंगी होती हैं और अति आधुनिक हॉस्पिटल को छोड़ कर अत्याधुनिक संसाधनों की कमी भी बनी रहती है। धनी देश और धनी समाज के लोगों के नवजात शिशु बचा भी लिए जाते हैं परंतु आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के 10 प्रतिशत से भी कम बच्चे बच पाते हैं और परिवार भी बड़े आर्थिक संकट में पड़ जाता है।

इन सब पक्षों को ध्यान में रखते हुए कुछ संवेदनशील चिकित्सकों ने ऐसे विकल्प के बारे में सोचना प्रारंभ किया जो बेहतर भी हो, नवजात की जान भी बच सके और परिवार पर आर्थिक बोझ को भी कम किया जाए। इन सब मापदंडों पर विचार के दौरान किसी को कंगारू की याद आई जो अपने नवजात को सीने से चिपकाए घूमती रहती है और उसका बच्चा तेजी से बढ़ता है। इसी विचार को मूर्त रूप देकर अध्ययन किए गए और जो तरीका सामने आया उसे कंगारू मदर केयर या कंगारू मातृत्व संरक्षण कहा गया।

कोई 200 से भी ज्यादा शोध हुए जिनमें पाया गया कि प्रीमेच्योर नवजात को जन्म के तुरंत बाद माता के सीने से सटा कर रखा जाना चाहिए। शिशु और माता की त्वचा के बीच कोई महीन से महीन वस्त्र भी नहीं होना चाहिए। ऐसे में मां के शरीर की ऊर्जा से नवजात का तापमान सामान्य रहने लगता है और उसके जीवन पर मंडराता यह सबसे बड़ा खतरा दूर होने लगता है क्योंकि शरीर के तापमान का कम होना यानि हाइपोथर्मिया बहुत घातक होता है। मां के संपर्क से बच्चे की भूख भी जाग्रत होती है, उसमें सुरक्षा की भावना विकसित होती है और किसी बैक्टीरिया संक्रमण की संभावना भी नहीं रहती है। इस तरह से देखा जाए तो मां का आगोश एक प्राकृतिक आई सी यू बन जाता है। शोध में पाया गया है कि खतरे में पड़े इन नवजात शिशुओं के जीवित रहने की संभावना सुपर आई सी यू और कंगारू मदर केयर में तकरीबन एक जैसी ही है।

 

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