कमीशनखोरी की भेंट चढा बाल चिकित्सालय, अब बना नशेड़ियों का अड्डा।

चित्तौड़गढ़-गोपाल चतुर्वेदी।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रदेश में लगातार चिकित्सा व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने के लिए और आमजन को बेहतर चिकित्सा सेवाए उपलब्ध करवाने के लिए पिछले 4 साल से प्रयासरत रहे हैं। वही दूसरी तरफ चित्तौड़गढ़ मुख्यालय के कलेक्ट्रेट चौराहे के समीप स्थित पुराने महिला एवं बाल चिकित्सालय में मरम्मत और नवीनीकरण के नाम पर कमीशन के खेल के चलते करोड़ों रुपए कार्य कराए गए हैं जो कि आमजन के मेहनत कि खरी कमाई के है। इन करोड़ों रुपए के कार्यों की बंदरबांट मे सत्ताधारी पार्टी के स्थानीय राजनेताओं अधिकारियों के कमीशन के खेल पर अब गर्दुल्ले मौज मस्ती कर रहे हैं। अब हालात यह बन गए हैं कि यह चिकित्सालय गर्दुल्लो का अड्डा बन गया है, जो कि पीछे के चिकित्सालय परिसर के पीछे लगी खिड़कियों के रास्ते से अंदर प्रवेश करके सामान को गायब करने में लगे हैं। वही कैमरा में कैद तस्वीरों में हालात सब बयां कर रहे हैं की करीब 2 महीने पहले इस चिकित्सालय में स्थानीय राजनेताओं की लालसाओ और हठधर्मिता के चलते नवीनीकरण मरम्मत के नाम पर करीब डेढ़ करोड़ रुपए के कार्य करवाए गए लेकिन कुछ ही दिनों के बाद आज स्थिति यह है कि एक बार फिर से यह भवन धीरे-धीरे जर्जर होने की स्थिति में पहुंचने लगा है। जानकारी के अनुसार राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने सन 1960 में पुराने महिला एवं बाल चिकित्सालय का शिलान्यास किया था कई वर्षों तक इस भवन में जिला चिकित्सालय संचालित हुआ करता था। उसके पश्चात श्री सांवलिया जी मंदिर मंडल की ओर से नए चिकित्सालय भवन के निर्माण में सहयोग करने पर नया भवन बनकर तैयार हुआ, उसके बाद से लेकर अभी तक पुराना चिकित्सालय पूरी तरह से चोरों और गर्दुल्ला के हवाले हो गया। जिसमें समय-समय पर कमीशन के खेल के चलते करोड़ों रुपए लगाकर नवीनीकरण करवाया जाता है। लेकिन इसकी उपयोगिता तब से लेकर आज तक शून्य ही दिखाई दी है। अभी हाल ही में 2 महीने पहले भी राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त सुरेंद्र सिंह जाड़ावत और नगर परिषद सभापति संदीप शर्मा की पहल पर इस भवन में मरम्मत और नवीनकरण के नाम पर डेढ़ करोड़ रुपए लगाए गए। लेकिन कुछ ही महीनों के बाद रखरखाव के अभाव में गर्दुल्ला का अड्डा बन गया है जो कि पीछे के रास्ते से चिकित्सालय परिसर में प्रवेश करके खिड़कियों पर लगी एलुमिनियम के फ्रेम,पंखे लाइट सहित अन्य उपकरण खोलकर ले जाने में लगे हैं। जानकारी में सामने आया है कि कुछ दिनों पूर्व कार्य संपन्न होने के बाद पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियो और जिला कलेक्टर ने इस भवन को पीएमओ दिनेश वैष्णव को भवन कि देखरेख करने के लिए कहा है। लेकिन 2 विभागों के पाट के बीच पिसकर में यह बिल्डिंग एक बार फिर से जर्जर होने के कगार पर पहुंच रही है।जानकारी में सामने आया है कि मात्र कुछ लोगों के कमीशन के खेल के चलते लगातार इस भवन में करोड़ों रुपए लगाए जाते हैं जिसका नतीजा कुछ भी दिखाई नहीं देता अगर दिखाई देता है तो सिर्फ इस पुराने चिकित्सालय परिसर में गर्दुल्ला का आतंक जिसके लिए पूरी तरह से कहीं ना कहीं जिला प्रशासन और राजनेता जिम्मेदार हैं।

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