धर्म परिवर्तन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं-बाबा मेजर सिंह।

श्रीगंगानगर-राकेश मितवा। 
खालसा फौज गुरु गोविन्द सिंह के द्वारा तैयार की गई है। उनकी माता गुजर कौर, चार साहिबजादों व सिख धर्म के नवम गुरु तेग बहादुर साहिब का शीश तीन सौ किलोमीटर दूर गुरु गोविन्द सिंह तक लाने वाले और धर्म की रक्षा हेतु अपनी व अपने पूरे परिवार की शहादत देने वाले भाई जैता उर्फ रंगरेटे गुरू के बेटे अमर शहीद बाबा जीवन सिंह सहित 40 सिंघो के द्वारा धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए शहादते दी गई थी। इसलिए धर्म परिवर्तन को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वो राजस्थान में हो या देश के किसी भी राज्य में। जहां जहां धर्म परिवर्तन की बात होगी वहां वहां इस तरह के कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरूक किया जाएगा। ये बात दशमेश तरना दल पंजाब के मुखी बाबा मेजर सिंह सोढी ने सुखाड़िया सर्किल रामलीला मैदान में आयोजित महासंगम कार्यक्रम में कही। अमर शहीद बाबा जीवन सिंह के इतिहास तथा उनके द्वारा दी गई कुर्बानियों से लोगों को रू-ब-रू करवाने के उद्देश्य से सुखाड़िया सर्किल रामलीला मैदान में शिरोमणि जरनैल अमर शहीद बाबा जीवन सिंह सेवा समिति द्वारा आयोजित तीन दिवसीय शहीदी दिहाड़ा एवं महासंगम कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम संयोजक हरप्रीत सिंह ने बताया कि इस अवसर पर अखंड पाठ साहिब के भोग उपरांत कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दशमेश तरना दल के हैड प्रचारक ज्ञानी मनदीप सिंह विद्यार्थी ने उपस्थित संगत को सम्बोधित करते हुए कहा कि मजहबी सिख शब्द दसवें पातशाह साहिब गुरु गोविन्द सिंह का दिया शब्द है अर्थात जो व्यक्ति अपने धर्म के प्रति परिपक्व है वही मजहबी है। मजहबी कौम को यह नाम अपने धर्म के प्रति परिपक्व होने के कारण मिला है लेकिन साक्षरता के अभाव और नशे के कारण मजहबी सिख समाज आज दूसरे समाजों की अपेक्षा पिछड़ रहा है।दूसरे धर्म के लोग इन भोलेभाले लोगों को समय समय पर गुमराह करते हुए तथा लालच देकर अपने धर्म में शामिल करने को प्रेरित कर रहे हैं। इस बात पर व्यथा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि जहां-जहां धर्म परिवर्तन की बात सामने आएगी, वहां-वहां महासंगम जैसे कार्यक्रम आयोजित कर समाज के लोगों को जागृत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मजहबी सिख कौम समाज की धरोहर है आज इस धरोहर को बनाए रखने की आवश्यकता है। बाबा जीवन सिंह के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि बाबा जीवन सिंह के बिना सिख धर्म अधूरा है उन्होंने और उनके परिवार ने यदि ये कुर्बानियां नहीं दी होती तो आज सिख और हिंदू धर्म का कोई अस्तित्व नहीं होता। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सूफी गायक हंसराज हंस किसी कारण वश कार्यक्रम में नहीं पंहुच पाए अतः उन्होंने ऑनलाइन सम्बोधित करते हुए बाबा जीवन सिंह के इतिहास से संगत को रू-ब-रू कराया। हंसराज हंस के संदेश को पाण्डाल में लगाई गई बड़ी स्क्रीन पर दिखाया गया। इनके अलावा मालेरकोटला, पंजाब से धर्म जागरण प्रमुख स. गुरबचनसिंह मोखा व डॉ. हरबंस सिंह मुक्तसर ने भी सम्बोधित किया। इस दौरान गुरु का अटूट लंगर बरताया गया। इस अवसर पर राज. मजहबी सिख युवा मोर्चा के संरक्षक सेवानिवृत्त प्रिंसिपल भजन सिंह घारू, जिलाध्यक्ष लखवीर सिंह लक्खा, अमनदीप सिंह, राजू खोखर, मनजीतसिंह रंधावा, रघुवीर सिंह घारू, हरबंस सिंह मट्टू, राजू नाहर, अंग्रेज सिंह, अखिल राज. मजहबी सिख महासभा के प्रदेशाध्यक्ष जसविंदर सिंह धालीवाल, जिलाध्यक्ष सुखचैन सिंह धालीवाल, मीडिया प्रभारी रणजीत सिंह मट्टू, सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विभाग संघ चालक चिमनलाल, जिला संघ चालक अमरचंद बोरड़, सह जिला संघ चालक राजेंद्र सिंगल, नगर संघ चालक डॉ. संजीव कुमार चुघ, सहित संघ के पदाधिकारी कैलाश भसीन, कमल सिंह, धर्मेंद्र सिंह, जगदीश चन्द्र, पवन सारस्वत, रूकमानंद ‌‌गोयल, रमेश धींगड़ा, क्रांति चुघ, अजय लक्की दावड़ा तथा अन्य संगठनों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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