ग्रामीण विकास के लिए आपूर्ति आधारित मॉडल अपनाना जरूरी।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
पंचायती राज विभाग के शासन सचिव नवीन जैन ने कहा कि अभी तक गांवों में अधिकतर विकास स्थानीय लोगों की मांग पर आधारित होता है, लेकिन अब पंचायतीराज एवं जनप्रतिनिधियों के आपसी समन्वय से इसे आपूर्ति आधारित किए जाने की आवश्यकता है, क्योंकि शिक्षा और जागरूकता के अभाव में कई ग्रामीणजन विकास कार्यों और सेवाओं की मांग भी नहीं कर पाते। ग्रामीण विकास विभाग की शासन सचिव मंजू राजपाल ने ग्रामीण विकास योजनाओं की सफलता के लिए पंचायती राज की त्रिस्तरीय व्यवस्था के सभी घटकों को समन्वय से काम करने की आवश्यकता बताई। जैन एवं राजपाल पंचायती राज विभाग द्वारा राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के अन्तर्गत सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण के सम्बन्ध में विभिन्न जिलों के जिला प्रमुखों एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान पंचायती राज और सुशासन विषयक सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। यह प्रशिक्षण इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान में सम्पन्न हुआ। जैन ने कहा कि इसरो से प्राप्त भौगोलिक नक्शों में सभी प्राकृतिक स्थितियां और डीओआईटी के पास संस्थाओं, स्कूल, कॉलेज, आंगनबाड़ी, सड़क, बिजली, पानी की टंकी, ट्रांसफार्मर जैसी सभी जानकारियां उपलब्ध हैं, स्वामित्व योजना में आबादी का सर्वेक्षण भी इन नक्शों पर अंकित है। इनके जरिए सुविधाओं, परिसम्पत्तियों, संसाधनों की वर्तमान स्थिति और भविष्य की आवश्यकताओं का आकलन वैज्ञानिक रूप से किया जा सकता है। जैन ने सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को इन नक्शों पर काम करने के निर्देश देते हुए वर्तमान परिसम्पत्तियों को नक्शों पर अंकित कर आकलन करने एवं उसकी सहायता से ग्राम पंचायत समिति एवं जिला परिषद की भविष्य की विकास योजना का निर्माण करने को कहा। जैन ने सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को अपने जिले में जिला प्रमुख एवं विकास अधिकारियों की नियमित बैठक बुलाकर विकास कार्यो एवं आ रही समस्याओं के समाधान पर चर्चा करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला प्रमुखों से भी आग्रह किया किया कि इस बैठक में पूरा समय दें जिससे विकास कार्यों में उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जा सके और उन्हें क्षेत्र के कार्यो एवं योजनाओं की पूरी जानकारी मिल सके। ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल ने कहा कि पंचायती राज की त्रिस्तरीय व्यवस्था में सरपंच, प्रधान एवं जिला प्रमुख के कार्यक्षेत्र एवं पदनाम अलग हो सकते हैं लेकिन जब विकास कार्यों की बात हो तो तीनों को समन्वय से ही काम करना होता है। उन्होंने कहा कि विभाग में योजनाओं के लिए धनराशि की कमी नहीं है, बल्कि इसके समय पर उपयोग के लिए विशेष प्रयास एवं मॉनिटरिंग की जरूरत है। इससे पूर्व महिला हितैषी गांव से सम्बन्धित सत्र को निदेशक पंचायती राज डॉ. प्रतिभा सिंह ने सम्बोधित किया। पर्याप्त जल, स्वच्छ एवं हरा-भरा गांव सत्र को मनरेगा आयुक्त शिवांगी स्वर्णकार एवं स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के मिशन निदेशक प्रताप सिंह ने सम्बोधित किया। जिला प्रमुख स्तर पर सुशासन के लिए निगरानी के लिए सूचनाओं एवं आंकडों व जानकारियों का उपयोग सहित कई सत्र हुए। ग्राम, ब्लॉक, जिला पंचायत विकास योजनाओं पर भी सत्र हुए। प्रशिक्षण का आयोजन अरावली एवं यूनिसेफ के सहयोग से किया गया।

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