प्रदेश प्रभारी रंधावा अनुशासनहीनता बर्दाश्त करने के खिलाफ।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में कांग्रेस एकजुट दिखाई दे रही है। लेकिन आपसी मतभेद का अंडर करंट चल रहा है। यात्रा के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुट के बगावत करने वाले विधायकों पर कार्रवाई होने की संभावना है। कांग्रेस में अंदर ही अंदर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट व उनके गुटों के बीच यह चर्चा चल रही है कि भारत जोड़ो यात्रा के बाद पार्टी में नए समीकरण बन सकते हैं। इसकी वजह यह है कि यात्रा से ठीक पहले ही कांग्रेस के नए प्रभारी एवं पंजाब विधायक सुखजिंदर सिंह रंधावा ने ज्वाइन किया है। उन्होंने इस मामले को देखा नहीं है। उधर, गहलोत गुट के मुख्य किरदार यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने अपने बयान में कहा है कि कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, इसके मायने यह है कि आला कमान हमारे जवाब से संतुष्ट हैं। हम सब एक हैं।इस मुद्दे को लेकर राजस्थान कांग्रेस के नए प्रभारी एवं पंजाब के विधायक सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बताया कि मैंने तो भारत जोड़ो यात्रा से ठीक पहले ज्वाइन किया है, अभी हम यात्रा में एक साथ हैं। जहां तक अनुशासनहीनता का सवाल है, अभी किसी को भी क्लीनचिट नहीं दी गई है। मामला लंबित है। राजस्थान से भारत जोड़ो यात्रा खत्म होने के बाद इस मसले को देखेंगे। गलती कहां और किसने की है? उन्होंने बताया कि जहां तक कांग्रेस में अनुशासन का सवाल है, पार्टी में अनुशासनहीनता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो भी पार्टी आदेशों को नहीं मानेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गत 25 सितंबर को नए सीएम बनाने की बात पर बगावत करने और इस्तीफा देने वाले विधायकों के मामले में कार्रवाई की जाएगी। यात्रा के बाद दोनों पक्षों को सुनेंगे। कहां किसने गलती है, उसको देखा जाएगा। जो भी दोषी होंगे उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। भारत जोड़ो यात्रा में राजस्थान के नेताओं की परफोर्मेंस को भी देखेंगे। पार्टी में यह साफ संदेश है कि अनुशासनहीनता करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। यदि पार्टी के आदेश नहीं मानने है तो फिर पार्टी का मतलब ही क्या रह जाएगा? कांग्रेस में अनुशासन अब सबसे ऊपर रहेगा। आपको बता दें, कि गत सितंबर माह में राजस्थान में मुख्यमंत्री बदलने के लिए पार्टी का जो भी आदेश हुआ था, उसको नहीं माना गया। इसके खिलाफ कुछ विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी को इस्तीफे सौंप दिए थे। इसके बाद से ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट गुट के बीच खींचतान जारी है। पायलट समर्थक उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की लगातार पैरवी कर रहे है।

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