पूर्व सीजे की कमेटी करेगी दिवंगत खेतड़ी महाराजा की 15 हजार करोड़ की संपत्तियों की देखरेख।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
सुप्रीम कोर्ट ने खेतड़ी के आखिरी राजा दिवंगत सरदार सिंह की 15 हजार करोड की हैरीटेज संपत्तियों की देखरेख और मरम्मत के लिए राजस्थान और बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नांद्राजोग की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित करने के आदेश दिए हैं। इस कमेटी में हैरीटेज आर्किटेक्ट और आर्कियोलॉजीकल सर्वे आफ इंडिया के सदस्य शामिल होगें। इसके साथ ही कोर्ट ने अदालती आदेश की पालना में हैरीटेज संपत्तियों की देखरेख करने के लिए अपने कब्जे में नहीं लेने पर जयपुर कलक्टर को अवमानना नोटिस भी जारी किए हैं। सुनवाई के दौरान खेतड़ी ट्रस्ट ने एक खोए हुए खजाने के नाम से एक बुकलेट पेश की तो कोर्ट ने इन हैरीटेज संपत्तियों की मरम्मत और देखरेख में राज्य सरकार की उदासीनता को देखते हुए यह आदेश दिए हैं। हालांकि कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से पांच करोड रुपए का बजट देने पर खुशी जताई है। यह पैसा कमेटी के हरी झंडी दिखाने पर ही दिया जाएगा। कोर्ट ने जस्टिस नांद्राजोग के लिए फिलहाल एक लाख रुपए प्रति विजिट या सिटिंग तय की है,लेकिन इस फीस में आगे कार्य की प्रकृति के अनुसार बदलाव भी किया जा सकेगा। 
छह सप्ताह में हटाएं अतिक्रमण।
कोर्ट ने खेतडी महाराजा की हैरीटेज संपत्तियों पर हो रहे कब्जों को छह सप्ताह में हटाने के निर्देश देते हुए किसी भी अन्य कोर्ट में इस संबंध में कोई कार्यवाही नहीं करने के निर्देश भी दिए हैं। भविष्य में अतिक्रमण को रोकने के लिए कलक्टर सुरक्षा उपलब्ध करवाएंगे। 
कीमती सामान की लिस्ट पेश करो।
कोर्ट ने कहा है कि सरकार ने पूर्व महाराजा की संपत्ति में चल रहे एक होटल को भी अपने कब्जे में लिया था और होटल में कई कीमती सामान मौजूद थे और यह हैरीटेज का हिस्सा हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को ऐसी सभी चल संपत्तियों केा सूची पेश करने के के साथ ही यह भी बताने केा कहा है कि इन संपत्तियों को ​कैसे और कहां रखा हुआ है। कोर्ट ने कमेटी को जल्द से जल्द रिपोर्ट पेश करने के निर्देश देते हुए मामले में अगली सुनवाई 21 मार्च को तय की है। 
यह है मामला।
एडवोकेट देवेद्र सिंह राघव ने बताया कि दिवंगत सरदार सिंह खेतडी के आखिरी राजा थे। वह ब्रिटेन से बॉर एट लॉ करके आए थे और संविधान सभा के सदस्य रहने के साथ ही कई देशों में राजदूत तथा राज्यसभा सदस्य रहे थे। 1987 में उनकी मृत्यु हो गई थी और उनके ना कोई संतान थी ना ही पत्नी जीवित थीं। इस पर राज्य सरकार ने खेतडी,जयपुर,माउंट आबू तथा दिल्ली में फैली उनकी करीब 15 हजार करोड रुपए की संपत्ति को निर्व​सयति मानते हुए राजसात यानि अपने कब्जे में ले ली थी। इसी दौरान दिवंगत महाराजा की एक वसीयत सामने आई और इसके आधार पर प्रोबेट जारी करने की कार्यवाही दिल्ली हाईकोर्ट में शुरु हुई। 2012 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उक्त वसीयत को फर्जी माना था। इधर राज्य सरकार की संपत्ति कब्जे में लेने की कार्यवाही को भी खेतडी ट्रस्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी जो कि दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के नहीं आने तक रुकी हुई थी। राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने खेतड़ी महाराजा की संपत्ति पर सरकारी कब्जे की कार्यवाही को गैर-कानूनी घोषित करते हुए वापिस लौटाने के आदेश दिए थे। राज्य सरकार ने इसी आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रखी है। एडवोकेट राघव खेतड़ी के दिवंगत महाराजा के रिश्तेदार सुरेद्र सिंह अलसीसर और शोभा कंवर की ओर से मामले में पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वसीयत के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ में सुनवाई चल रही है,लेकिन खंडपीठ ने अभी तक उक्त वसीयत को फर्जी घोषित करने वाले एकलपीठ के फैसले पर कोई रोक नहीं लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने ​हाईकोर्ट को इस मामले में जल्द से जल्द सुनवाई कर निपटाने को भी कहा है।

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