मुख्यमंत्री जन आवास योजना के लाभार्थी दर दर ठोकरें खाने को मजबूर।

चित्तौड़गढ़-गोपाल चतुर्वेदी।
राज्य सरकार के निर्देश पर जिला कलेक्टर अरविंद कुमार पोसवाल ने शुक्रवार को जनसुनवाई केंद्र मे तृतीय जनसुनवाई का आयोजन किया। जिसमें प्रमुख रुप से नगर परिषद की ओर से गांधीनगर क्षेत्र में बनाए गए मुख्यमंत्री जन आवास योजना के लाभार्थियों ने योजना के अंतर्गत बनाए गए मकानों कोई स्तरहिन बताते हुए इसकी गुणवत्ता की जांच करवाने की मांग की। जिला कलेक्टर अरविंद कुमार पोसवाल आज जनसुनवाई केंद्र तृतीय जनसुनवाई का आयोजन किया जिसमें  बिजली, सड़क पानी के मुद्दों के साथ नगर परिषद से जुड़े कई मुद्दे देखने को मिले। लेकिन प्रमुख रूप से मुख्यमंत्री जन आवास योजना का मुद्दा छाया रहा योजना के लाभार्थियों ने जनसुनवाई में उपस्थित होकर योजना के अंतर्गत बनाए गए आवासों को लेकर गहरी नाराजगी प्रकट की सभी लाभार्थियों ने मुख्यमंत्री जन आवास योजना के अंतर्गत बनाए गए फ्लैट्स को स्तरहीन बताते हुए इसकी गुणवत्ता जांच करवाने की मांग की। इसके बारे में जानकारी देते हुए लाभार्थी रीना टेलर ने बताया कि वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री जन आवास योजना के अंतर्गत आवास देने की प्रक्रिया शुरू हुई थी लेकिन तय सीमा समाप्त होने के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि अपने आशियाने के लिए विपरीत परिस्थितियों में ब्याज पर लाखों रुपए लेकर उन्होंने नगर परिषद में जमा कराया है उसके बाद भी उन्हें अभी तक परेशानी के सिवा कुछ नहीं मिला है। कई बार उन्होंने नगर परिषद आयुक्त, सभापति और जिला कलेक्टर के दफ्तरो के चक्कर लगाए हैं लेकिन उन्हें अभी तक न्याय नहीं मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि नगर परिषद के सहायक अभियंता नरेंद्र कुमार कई बार उन्हें झूठे आश्वासन देते आए हैं। अब उन्हें लगता है कि नगर परिषद के अधिकारी आयुक्त और सभापति सभी हेमा कंस्ट्रक्शन के ठेकेदार से मिले हुए हैं और उनके आशियाने को अभी तक उन्होंने रहने के लायक नहीं बनाया है।वही इस बारे मे सहायक अभियंता नरेंद्र कुमार से बात करने का प्रयास किया तो है कैमरे और सवालों से बचाते हुए दिखाई दिए सवालों का बिना कोई जवाब दिया वहां से रवाना हो गए। इससे यह साफ जाहिर होता है कि लाभार्थियों के लगाए गए आरोप कहीं ना कहीं सही साबित हो रहे हैं l

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