क्षण भर का चमत्कार है ब्रह्मांड - डॉ. रामावतार शर्मा


 कोई 1500 करोड़ पहले कहीं कुछ नहीं था, सब कुछ शून्य था। अचानक एक सेकंड में 200, 0000000000 किलोमीटर का ब्रह्मांड एक अवर्णनीय धमाके के साथ में अस्तित्व में आ गया और तब से अब तक यह लगातार बढ़ता जा जा रहा है। अब तो ब्रह्मांड का ना कोई ओर है न कोई छोर। ब्रह्मांड की कोई सीमा रेखा नहीं है बल्कि इसके पार तो कुछ भी नहीं है, शून्य भी नहीं। एक अनंत कृति बस एक सेकंड में जिस घटना से फैली उसे विज्ञान में बिग बैंग थ्योरी ( बड़ा धमाका ) कहा जाता है। बिग बैंग नाम खगोलविद फ्रेड हॉयल ने दिया पर वह खुद इस थ्योरी को नहीं मानते थे। उनके अनुसार यह थ्योरी हमें वापस बाइबल की तरफ ले जाती है, विज्ञान से दूर। पर आने वाले समय में हॉयल गलत सिद्ध हुए।

यहां पर यह जानना रोचक होगा कि बड़े धमाके के बाद अगले चंद क्षणों में क्या हुआ होगा, विज्ञान उन घटनाओं को कैसे प्रतिपादित कर रहा है। विस्फोट के साथ ही अरबों आकाशगंगा ( गैलेक्सी ) बन गई जिनमें हर आकाशगंगा में अरबों तारे बने, खरबों गृह, उपग्रह, निहारिकाएं और अन्य कितनी ही कृतियां निर्मित हुई। आकाशगंगाओं के झुंड होते हैं और फिर झूंडों के भी झुंड होते हैं जिन्हे महा झुंड या सुपरक्लस्टर कहा जाता है। हमारी आकाशगंगा जिस झुंड में आती है उसे स्थानीय समूह ( लोकल ग्रुप ) कहा जाता है। इस झुंड में 30 आकाशगंगा हैं। इस झुंड के सबसे निकट जो आकाशगंगा है उसका नाम एंड्रोमेडा है जो हमारी गैलेक्सी से 22 लाख प्रकाश वर्ष दूर है। यह दूरी एक सामान्य व्यक्ति के गिनने की क्षमता के बाहर है।

भविष्य के पदार्थ के तत्व तो बड़े धमाके के पहले सेकंड में ही बनने प्रारंभ हो गए थे पर पहली गैलेक्सी और तारे को बनने में कोई 200 करोड़ वर्ष लगे। धमाके के समय ब्रह्मांड का तापमान 100,000 खरबों अरब डिग्री सेल्सियस रहा होगा जो कोई 100 सेकंड बाद 100,000 करोड़ों करोड़ डिग्री सेल्सियस रह गया होगा। ब्रह्मांड में मुख्य विकिरण तापमान और प्रकाश है जिनमें गुरुत्वाकर्षण का समावेश होता रहता है। तापमान खरबों खरबों डिग्री से अरबों अरब डिग्री सेल्सियस गिरने के फलस्वरूप पहने अणु से भी सूक्ष्म कण और फिर उनके योग से प्रोटोन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन का निर्माण हुआ जिन्होंने अणु का निर्माण किया। माना जाता है कि यहां से कोई 32,000 साल बाद जा कर सबसे सामान्य केंद्रक ( न्यूक्लियस) बने जिनसे हाइड्रोजन और हीलियम गैस विकसित हुई। अगले 100 करोड़ वर्षों में ब्रह्मांड का तापमान 4000 डिग्री सेल्सियस आ गया तो गुरुत्वाकर्षण विकसित हुआ जिसके कारण अणु आपस में गुच्छे में आने लगे और पदार्थ का विकास हुआ होगा।

अगले 200 करोड़ वर्षों में आकाशगंगाओं और तारों का जन्म हुआ जिनका आधार हाइड्रोजन और हीलियम के बादल थे। इन्ही बादलों के कारण आज भी नए तारे विकसित हो रहे हैं और असंख्य नई आकाशगंगा भी। हमारी आकाशगंगा एक घूमती हुई कुंडली ( रोटेटिंग स्पाइरल ) जैसी है जिसमें करोड़ों तारे हैं। उदाहरण के लिए इस कुंडली की एक भुजा है जिसे ओरियन भुजा कहा जाता है। हमारा सूर्य इसी भुजा में स्थापित है और इस भुजा  के केंद्र से 24,000 प्रकाश वर्ष दूर है। ध्यान रहे की एक प्रकाश वर्ष का मतलब 95 खरब किलोमीटर होता है। शहर से बाहर किसी खुले मैदान या फिर किसी पहाड़ी के ऊपर से रात्रि में जो आकाश हम देखते हैं वह हमारी आकाशगंगा का गहनता से भरा हुआ केंद्र है।

हमारा सौर मंडल ब्रह्मांड में सागर की बूंद जैसा है और सूर्य तारों की श्रेणी में एक छोटा तारा है जिसके नो गृह हैं, हर गृह के अपने उपगृह हैं। इसके अलावा कोई 10,000 एस्ट्रॉइड्स ( छुटकू तारे ) भी हमारे सौर मंडल का हिस्सा हैं। पृथ्वी सूर्य से एक करोड़ पचास लाख किलो मीटर दूरी पर स्थित है जबकि सबसे दूर का प्लूटो 59 करोड़ किलो मीटर दूर है। यहां यह ध्यान रखना होगा कि सूरज जैसे एक छोटे तारे की उम्र विशालकाय तारों से बहुत ज्यादा होती है क्योंकि ये ज्यादा संतुलित होते हैं।

ब्रह्मांड में जो कुछ अरबों वर्ष पहले हुआ उसका पता हमें प्रकाश किरणों और रेडियो तरंगों से लगता है जिसे हबल और जेम्स वेब जैसे टेलीस्कोप ( दूरदर्शी यंत्र ) पकड़ते हैं। वर्गों नामक झुंड से पृथ्वी तक प्रकाश किरण को आने में पांच करोड़ साल लगते हैं इसलिए हम जान सकते हैं कि पांच करोड़ साल पहले वहां क्या हुआ होगा। इस तरह से हम 1300 करोड़ साल पहले की आकाशगंगाओं के बारे में अंदाजा लगा सकते हैं जो बिग बैंग के 200 करोड़ साल बाद बनी थी।

आखिर में हमें एक बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए। इस अति विशालतम ब्रह्मांड के संभवतः सबसे विकसित जीव का नाम मनुष्य है। हमें सोचना है कि क्या हम अपनी इस अतिविशिष्टा को भूल कर पूरा जीवन भटकाव में ही गुजार रहे हैं ? भविष्य की अनंत संभावनाओं को भुला कर हम हर समय काल्पनिक भूतकाल में जी रहे हैं और जिसके हम साक्षी नहीं उस घटना को सत्यापित करने में हमारी ऊर्जा का ह्रास कर रहे हैं। क्या पूरी मानव जाति कभी जान पाएगी कि वह भविष्य निर्मित करने के लिए धरती पर विकसित हुई है ना कि गड़े मुर्दों को उखाड़ने के लिए आई है।    

 

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