पहाड़ , ज्वालामुखी और एक भटकती रूह - डॉ. रामावतार शर्मा

डियन फॉसे एक अमेरिकन व्यावसायिक प्रशिक्षक ( ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट ) एवम् प्राइमेट विशेषज्ञ थी। जब वह 6 वर्ष की थी तो माता पिता का तलाक हो गया, कठोर माता ने फिर बाप बेटी को मिलने तक नहीं दिया और सौतेले पिता की उपेक्षा से पीड़ित बालिका डियन घुड़सवारी और जानवरों के प्रति स्नेह में डूब गई। ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट बन कर रवांडा के अपाहिज बच्चों की सेवा करने लगी। वहां पर उसने पूरे विश्व का ध्यान लुप्त होने के कगार पर खड़े पर्वतीय गोरिल्ला की तरफ आकर्षित किया। रवांडा, युगांडा और कांगो के त्रिकोण पर फैले विरूंगा पहाड़ पर्वतीय गोरिल्ला का एकमात्र घर हैं। इन्हे पकड़ पर जू में बेचने या फिर इनके सिर और हाथ पैर काट कर अमीरों के ड्राइंग रूम सजाने के चक्कर में इनकी संख्या 250 से भी कम हो गई थी। ऐसे में डियन के जोरदार प्रयास से ये गोरिल्ला बचाए जा सके।

विरुंगा पर्वत श्रृंखला मैदानों से सीधी आसमान की तरफ उठती है और 58 किलोमीटर लंबी श्रृंखला में 8 ज्वालामुखी हैं जिनमें छह तो अब शांत और विलुप्त हो गए हैं पर दो अभी भी आग और लावा उगलते रहते हैं। कमांडर नामक एक ज्वालामुखी तो 24 किलोमीटर तक लावा फेंक कर रास्ते का सब कुछ जला देता है। लावे की राख नदियों के बहाव को रोक कर उन्हें झीलों में परिवर्तित कर देती है। एक ऐसी ही झील बनी है जिसका नाम है किवु झील जो कोई 400 मीटर गहरी है और इसके पानी के जबरदस्त दवाब के कारण इसके पैंदे में कार्बन डाइऑक्साइड का विशाल भंडार दबा पड़ा है जो एक तरह का टाइम बम है। एक दिन यह गैस पानी के दबाव को तोड़ती हुई तेज गति से बाहर निकलेगी और एक बड़े क्षैत्र पर कार्बन डाइऑक्साइड की चादर फैल जाएगी जिसमें असंख्य मनुष्य और जीव जंतु दम घुटने के कारण मर जायेंगे।

आज भी बैक्टीरिया के प्रभाव से इस गैस का कुछ हिस्सा अति ज्वलनशील मीथेन गैस में परिवर्तित हो रहा है और स्थानीय लोग इस मीथेन की पंपिंग करके इसे घरेलू गैस की तरह उपयोग में लें रहे हैं। यदि किसी दिन इस गैस के भंडार ने कोई चिंगारी पकड़ ली तो अति विनाशकारी अग्नि बम जैसा विस्फोट हो जायेगा।विरुंगा पर्वतमाला के नीचे के भूभाग को खेती की जमीन में परिवर्तित कर लिया गया है पर ऊंचाई पर बांस के घने जंगल, घास और झाड़ियों के विशाल मैदान आज भी कोई 180 प्रजाति की चिड़िया और 60 तरह के स्तनधारी जीवों को प्रश्रय दे रहे हैं। यहां के गोरिल्ला इंसानों से दूरी बना कर 5-20 तक के परिवार के रूप में रहते हैं। डियन फॉसे गोरिल्ला से कुछ दूरी बना कर उनकी ही तरह चलती और घास खाती थी। अपने इन प्रयासों के फलस्वरूप एक दिन वह पहली इंसान बनी जिसे एक गोरिल्ला ने आगे बढ़ कर छुआ। उसके बाद उसकी मित्रता इन जीवों से गाढ़ी होती गई। फॉसे ने इनके शिकार करने वालों के लिए मौत की सजा की मांग की पर एक दिन किसी अज्ञात हत्यारे ने 53 वर्षीय इस गोरिल्ला रक्षक महिला की उसी के पहाड़ी कैंप में गया कर डाली। हत्यारे का आज तक निश्चित तौर पर पता नहीं चला। डियन आक्रामक स्वभाव की तो गोरिल्ला शिकारी, सोने के तस्कर, उनके अपने सहयोगी एवम् कई साथी भी उनसे खफा रहते थे इसलिए वीरान जंगल में हुई इस हत्या का पता लगना संभव नहीं हो पाया। फॉसे को उसकी पुस्तकों और उनकी एक किताब पर बनी फिल्म से प्राप्त लाखों रुपए का धन अदालत ने उसकी मां को सुपुर्द किया जिस मां के कड़े रुख की वजह से वह पिता के प्यार से वंचित रही। डियन की हत्या से विश्व में गोरिल्ला के प्रति जागरूकता फैली, उनके शिकार पर रोग लगी और आज उनकी संख्या दुगनी हो गई है।

 

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