जनसुनवाई के बीच हंगामा, कलेक्टर को दोबारा शुरू करवानी पड़ी जनसुनवाई।

हनुमानगढ़-विश्वास कुमार।
हनुमानगढ़ कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय जनसुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान उस समय हंगामे की स्थिति पैदा हो गई जब जिला कलेक्टर की ओर से दोपहर करीब एक बजे जनसुनवाई बंद कर दी गई। इससे नाराज दूर-दराज से फरियाद लेकर आए लोगों ने सभागार के बाहर हंगामा कर दिया। फरियादी कुछ देर तक शोर-शराबा करते रहे। इस पर जिला कलेक्टर को दोबारा जनसुनवाई शुरू करवानी पड़ी। जिला कलेक्टर रुक्मणि रियार सिहाग की अध्यक्षता में जिला स्तरीय जनसुनवाई कलेक्ट्रेट सभागार में सुबह 11 बजे से शुरू हुई। जनसुनवाई के दौरान मुख्य सचिव ऑफिस, प्रमुख शासन सचिव ऑफिस के स्तर पर भी वर्चुअली राज्य स्तर से जुड़े। इस दौरान जिला कलेक्टर के सामने कई परिवेदनाएं आई। इसमें से कई परिवेदनाओं का जिला कलेक्टर ने मौके पर ही निस्तारण किया। दोपहर करीब एक बजे जिला कलेक्टर ने जनसुनवाई रोक दी और वे अपने चैम्बर में चली गईं। उस समय सभागार के बाहर कई फरियादी अपनी फरियाद सुनाने के लिए खड़े थे। जब उन्हें पता चला कि जनसुनवाई बंद हो गई तो वे नाराज हो गए और हंगामा कर दिया। हनुमानगढ़ टाउन से अपनी फरियाद लेकर पहुंची बुजुर्ग महिला मैनादेवी ने रोते हुए कहा कि वह हर बार जनसुनवाई में अपनी समस्या लेकर आती है, लेकिन उसकी समस्या का निस्तारण नहीं हो रहा। आज वह अपनी बारी का इन्तजार कर रही थी कि बीच में ही जनसुनवाई बंद कर दी गई। मैनादेवी का कहना था कि अगर समस्या का निस्तारण नहीं हो रहा तो इस तरह के जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित करने का क्या फायदा। इससे तो अच्छा है कि जनसुनवाई बंद कर दी जाए ताकि लोग बेवजह परेशान न हों। मैनादेवी का कहना था कि आज वह अपनी समस्या का निस्तारण करवाकर ही जाएगी। नहीं तो वह कलक्ट्रेट परिसर में आत्महत्या कर लेगी। वहीं गांव पक्कासारणा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता हरविन्द्र सेठी ने आरोप लगाया कि गांव पक्कासारणा में मनरेगा योजना में भारी भ्रष्टाचार हो रहा है। काम पर न आने वाले व्यक्तियों की पूरे-पूरे पखवाड़े मनरेगा में हाजरी लग रही है। दो बार इसकी शिकायत जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को की गई। सीईओ ने एक्सईएन को लिखा जो गांव पक्कासारणा के ही हैं। वे जांच करने के लिए पात्र ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उदाहरण के तौर पर रोजाना एक हजार मनरेगा श्रमिकों की हाजरी लगती है, लेकिन जांच की जाए तो कार्यस्थल पर पांच सौ श्रमिक भी नहीं मिलेंगे। फर्जी तरीके से हाजरी लगाई जा रही है। शमशान भूमि व स्टेडियम के नाम से फर्जी हाजरियां लग रही हैं। उनका कहना था कि आज वे शिकायत लेकर जिला स्तरीय जनसुनवाई में जिला कलेक्टर के पास पहुंचे हैं कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। जिला स्तरीय जनसुनवाई में भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। हंगामे के बीच जिला कलेक्टर ने दोबारा जनसुनवाई शुरू की तो लोग शांत हुए।

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