जो शब्दों को आकार दे वही पत्रकारिता-कुमार प्रशांत

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ओम थानवी ने कहा कि गांधीजी एक पत्रकार से भी अधिक एक बेहतर कम्युनिकेटर थे। उन्होंने यह कहा कि पत्रकारिता समाज सेवा के लिए हो न कि व्यवसाय के लिए। थानवी महात्मा गांधी इन्स्टीट्यूट ऑफ गवर्नेन्स एण्ड सोशल साइन्सेज में गांधी दर्शन पर आयोजित छह दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अमेरिका से आये डॉक्टर परीक्षित सिह गांधी को पाश्चात्य जगत में किस प्रकार देखा और समझा जाता है, इसे रेखांकित करते हुए कहा कि हमें गांधी को समझने के लिए वर्तमान में एक नवीन द्वष्टि की आवश्यकता है। समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक प्रो बीएम शर्मा ने कहा कि विश्व के अधिकांश देशों में गांधी को जाना एवं समझा जाता है। गांधी ने अंहिसा जैसे पुरातन सिद्धांत को व्यवहार में लाकर देश को स्वतंत्रता दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज की अधिकांश वैश्विक समस्याओं का समाधान गांधी के चितन में निहित है। सत्र के प्रारम्भ में प्रो. संजय लोढ़ा ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए छह दिन से चल रहे कार्यक्रम का संक्षिप्त प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। संस्थान के प्रशिक्षक डॉ. विकास नौटियाल ने गांधी की प्रासंगिकता का विस्तार से उल्लेख किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. ज्योति अरूण द्वारा किया गया। संस्थान के विशेष अधिकारी डॉक्टर सौमित्र नाथ झा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रसिद्ध गांधी विचारक कुमार प्रशांत थे।उन्होंने कहा कि जो शब्दों को आकार दे वही पत्रकारिता है। प्रशिक्षण सत्रों में हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति सनी सैबस्टियन, नारायण सिह बारहठ, प्रो. राजन महान, डॉ. कमलनयन, गांधीवादी विचारक सवाई सिह, धर्मवीर कटेवा, प्रो संजय लोढ़ा, प्रो संगीता शर्मा द्वारा व्याख्यान दिए गए। प्रशिक्षण के अंतर्गत प्रशिक्षणार्थियों को अपना घर भगवान महावीर विकलांग सहायता केंद्र गांधी खादी आश्रम का भ्रमण करवा कर उन्हें गांधीवादी मूल्यों के व्यावहारिक पक्षों से अवगत करवाया गया।

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