नाटक 'लम्ही के लम्हे' का सशक्त मंचन।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, रविंद्र मंच सोसाइटी एवं ज्योति कला संस्थान के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय एस. वासुदेव नाट्य समारोह के अंतिम दिन जोधपुर के कलाकारों द्वारा मुंशी प्रेमचंद की कहानी पर आधारित 'लम्ही के लम्हे' नाटक का सशक्त मंचन किया गया। इस नाटक  की परिकल्पना और निर्देशन स्वाति व्यास ने किया। नाटक के मुख्य पात्र मुंशी प्रेमचंद के कुछ चुनिंदा लम्हे लेकर उन्हें बेचने निकलते हैं जिस लाठी पर उन्होंने लंबे स्टाक रखे थे, उन लम्हों के माध्यम से कहानी लवी के गांव के चरित्र और परिस्थितियों को मंच पर उकेरती है।
इन लम्हों में प्रेम, ममता, विरह, धार्मिक विषमता और विधवा विवाह के दृश्य निहित है। मुंशी हर रोज अपने लमहेरिया से नए-नए लमहे तोड़कर आज के लोगों को बीते सालों के लम्हों से मिलवाते हैं पर अंत में इन लम्हों की तिजारत करते करते थक जाते हैं और अपना लमहेरिया अपनी पत्नी शिवरानी को विरासत कर दुनिया छोड़ देते हैं। इसी उम्मीद से एक दिन कोई आएगा, उनका यह लम्हेरिया उठाकर फिर से निकल पड़ेगा। लम्हों की महत्ता समझाने और  उसकी खुशबू बिखेरने मंच पर पीयूष वर्मा, स्वाति व्यास, मोहन रुकमैं, स्वरू व्यास,  लक्ष्मण चौहान, गरिमा मोहन, कुलदीप चौहान, योगेश विश्नोई, राजेश विश्नोई, आवेश मोहम्मद, कमल, तनु राणा, विश्वेंद्र चौधरी, मयंक अग्निहोत्री, पंकज पुरोहित और इसान छंगानी ने अपने सशक्त अभिनय से इस नाटक को लोगों तक पहुंचा कर मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी को जीवंतता प्रदान की। नाटक में मंच सहायक राजेश विश्नोई, ध्वनि संचालन सुधांशु मोहन, रूप सज्जा पंकज कमल, तनुज राजेश, वस्त्र सज्जा स्वर्ण व्यास स्वाति व्यास राजेश और नाटक में प्रकाश, मंच और संगीत परिक्रमा अरुण व्यास की रही।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

ARwebTrack