राज्यपाल ने किया जावेद अख्तर पर लिखित पुस्तक 'जादूनामा' का लोकार्पण।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि सिनेमा मनोरंजन और कला की ऐसी विधा है जो प्रत्यक्ष जीवन से जुड़ी है। जो कुछ समाज में घटित होता है और जो परिवर्तन समाज में होता है, फिल्में उसका प्रतिबिम्ब होती हैं। राज्यपाल मिश्र विद्याश्रम स्कूल स्थित महाराणा प्रताप सभागार में सुप्रसिद्ध शायर और संवाद लेखक जावेद अख्तर पर अरविंद मंडलोई द्वारा लिखित पुस्तक 'जादूनामा' के लोकार्पण अवसर पर सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि फिल्में सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करती बल्कि आमजन में संदेश क प्रसार भी करती हैं। उन्होंने कहा कि जब बाजार पोषित मूल्यों के कारण लोगों का शब्द सामर्थ्य सीमित होता जा रहा है, कि ऐसे समय में भारतीय भाषाओं के शब्दों को सहेजने और उनके प्रसार में फिल्मों ने बड़ा योगदान किया है। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में 'शब्द' को 'ब्रह्म' की संज्ञा दी गयी है और जावेद अख्तर शब्द ब्रह्म से जुड़े इस समय के अप्रतिम साधक हैं। राज्यपाल ने अख्तर के जीवन के पन्नों को खोलने वाली इस किताब के शीर्षक को सर्वथा उपयुक्त बताते हुए कहा कि उन्होंने फिल्मों के संवाद और गीतों के रूप में जिन शब्दों को बरता है, वे शुद्धता की कसौटी पर बहुत खरे हैं, इसलिए वे सही मायने में शब्दों के जादूगर हैं। राज्यपाल मिश्र ने कहा कि संघर्ष व्यक्ति को निखारता है और उसे अधिक परिपक्व बनाता है। यह पुस्तक एक शायर और लेखक के संघर्षों और कामयाबी के सफर को बहुत ही सहज रूप में व्यक्त करती है। उन्होंने कहा कि पुस्तक जावेद अख्तर के जीवन के विभिन्न पहलुओं और अनुभवों पर बारीकी से नजर डालती है, जिन्हें पढ़कर लोगों को प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने पुस्तक में आए ऐसे ही एक अनुभव को साझा किया जिसमें 21 साल पहले जावेद अख्तर ने शराब और जिंदगी में से जिंदगी को चुना और फिर कभी शराब को छुआ भी नहीं।राज्यपाल ने इस अवसर पर राजस्थान की साहित्यिक समृद्धि की चर्चा करते हुए कहा कि यहां धरती धोरां री की रचना करने वाले कन्हैयालाल सेठिया जैसे महान कवि और पंडित भरत व्यास जैसे गीतकार हुए हैं जिन्होंने हिंदी सिनेमा के आरम्भिक काल में बहुत प्यारे और हिंदी भाषा की शुद्धता से लबरेज गीत दिए हैं। शायर जावेद अख्तर ने पुस्तक के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि इसमें उनके जीवन के अनछुए पहलुओं को लेखक मंडलोई ने बहुत रोचक ढंग से छुआ है। इस अवसर पर पुस्तक के लेखक अरविंद मंडलोई, अनुवादक रक्षंदा जलील सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

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