क्या नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयपुर आए थे?

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
तत्कालीन जयपुर राज्य के अंग्रेज़ आईजीपी एफ एस यंग ने सीकर के राजा और वहां की प्रजा पर ज़ुल्म ढहाना शुरु किया तब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जनता के आंदोलन का  भरपूर समर्थन किया। आईजीपी यंग ने  जयपुर से सीकर के स्टेशन पहुंची रेल के डिब्बे में बैठे आंदोलनकारियों को गोलियों से भून दिया था। इतिहासकार महावीर पुरोहित के मुताबिक तब जमनालाल बजाज की मौजूदगी में कोलकाता के मोहम्मद अली पार्क की सभा में नेताजी बोस ने आंदोलन तेज करने का आह्वान किया था। उस सभा में राजपुताना के नागरिक शामिल हुए।
जयपुर के प्रजा मंडल व आजाद मोर्चा  ने 21 नवंबर 1945 को आजाद हिंद फौज दिवस मनाया। सुभाष चंद्र बोस 23 जनवरी 1938 को जोधपुर आए और गिरदी कोट की सभा में युवकों को संबोधित किया। कांग्रेस के अध्यक्ष बने तब नेताजी ने जमना लाल बजाज के साथ मिले प्रतिनिधि को राजपूताना की  रियासतों के प्रजामंडल को भारतीय संघ में शामिल करने की घोषणा की। आजाद हिंद फौज के तीन सैनिकों को दिल्ली में फांसी सुनाने के खिलाफ अपील करने के लिए 1946 में जयपुर के महाराजा कॉलेज में हुई मीटिंग में  चिरंजी लाल अग्रवाल, बाबा हरिश्चंद्र आदि के आह्वान पर लोगों ने चंदा दिया। कुछ इतिहासकारों  का मानना है कि 1928 में नेताजी जवाहर लाल नेहरू के साथ चौड़ा रास्ता में नेहरूजी के ससुराल अटल भवन में सात दिन रुके थे। हालांकि इसका प्रमाणिक उल्लेख नहीं मिलता है। इतिहास से जुड़े देवेंद्र भगत के अनुसार नेताजी कांग्रेस अध्यक्ष बने तब वे देशी रियासतों के दौरे पर निकले तब जयपुर भी आए और वे टोंक होते हुए नीमच चले गए थे। 24 अगस्त 1945 को नेताजी का प्लेन क्रैश होने की सूचना मिली तब महाराजा कॉलेज में  हड़ताल और सभा हुई। जयपुर रियासत के हाकिम रहे प्यारेलाल कासलीवाल के पुत्र डॉ राजमल कासलीवाल नेताजी की आजाद हिंद फौज में कर्नल और उनके निजी चिकित्सक भी रहे। कासलीवाल सन 1942 में  गिरफ्तार हुए थे।कासलीवाल ने 1967 में गायत्री देवी के खिलाफ जयपुर से लोकसभा चुनाव भी लड़ा। एमआई रोड पर कटेवा भवन के हरिसिंह लाडोली ने नेताजी के आह्वान पर सन 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान घर छोड़ दिया और सन् 1943 में नवगठित आजाद हिंद फौज में सिपाही बने।  उनके पोते करण सिंह  ने बताया कि हरि सिंह आजाद हिंद फौज में कैप्टन बने। उन्हें सन1945 में  गिरफ्तार कर अंडमान निकोबार की जेल में दो साल रखा गया।  जयपुर के संस्कृत विद्वानों ने 1947 से 1967 तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन दर्शन पर संस्कृत में अनेक महाकाव्य भी लिखे। नेताजी की सेना में ढूंढाड़ और शेखावाटी के अनेक सैनिक भर्ती हुए। सुभाष चौक के चौराहे पर लगी नेताजी की मूर्ति उनकी याद ताजा करती है। सुभाष चौक व्यापारिक संस्थान व शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश शर्मा व पार्षद मास्टर रामशरण अनंत्यानुप्रासी आदि ने जनसहयोग से बोस की मूर्ति को 13 फरवरी 1972 को हकीम मार्टीन के चौराहे पर लगवाया था। मूर्ति लगने के बाद चौराहे का नाम सुभाष चौक के नाम से मशहूर हो गया। मूर्ति की स्थापना समारोह में गायत्री देवी सहित शहर के सैकड़ो लोग मौजूद थे।

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