पुण्य,पूजा,पकवान और पावणों में बीता सक्रांति पर्व-गुलाबी नगरी का आकाश पंतगों से हुआ रंगीन।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजधानी जयपुर मे मकर सक्रांति पर सूर्योदय होने पर पिछले दो साल जैसी ही शांति थी लेकिन धूप निकलते ही के साथ ही वो काटा...वो मारा...का शोर गुंजायमान हो गया। पतंगबाजी का खुमार कड़ाके की ठंड में लोगों पर छाया रहा। शहर में डीजे के साथ पतंगबाजी का दौर शुरू हुआ। 
इस बार सूर्य शनिवार रात 8 बजकर 45 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेगा। ऐसे में दान पुण्य का योग 15 जनवरी होगा। वहीं राजधानी में राधे गोविंद देव जी मंदिर में शनिवार को सोने-चांदी की पतंग चरखी के साथ ठाकुर जी की विशेष झांकी सजाई गई है। मकर संक्रांति के अवसर पर जगमोहन में पतंगों से सजावट की गई और भगवान को दिल के पकवानों का भोग लगाया गया। भगवान के दर्शन करने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर में पहुंचे। वहीं त्योहार के मौके पर पक्षियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सुबह 6 बजे से से 8 बजे तक और शाम 5 बजे से 7 बजे तक के बीच पतंग उड़ाने पर रोक लगाई। साथ ही प्लास्टिक, सिंथेटिक, लोहा, ग्लास और दूसरे हानिकारक पदार्थों से बने मांझे के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लगाई है। 
दिन भर पतंग उड़ाने के बाद जयपुर वासियों ने ना केवल अंधेरा होने के बाद लालटेन उड़ाई बल्कि जबरदस्त आतिशबाजी कर दीवाली सा माहौल बना दिया। 
जलमहल की पाल पर काईट फेस्टिवल का आयोजन।
इधर राजस्थान पर्यटन विभाग की ओर से जलमहल की पाल पर काईट फेस्टिवल का आयोजन किया गया। काईट फेस्टिवल में देसी-विदेशी सैलानी बड़ी तादाद में जमकर पतंगबाजी का लुफ्त उठाने पहुंचे। सैलानियों ने पतंगबाजी के साथ पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन पकौडियां, तिल के लड्डू, फीणी का भी स्वाद लिया। फेस्टिवल में पतंग प्रदर्शनी, पतंगबाजी प्रतियोगिता, फैंसी पतंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। सैलानी पतंगबाजी के दांव पेंच लड़ाते हुए लोक धुनों पर थिरकते नजर आए।
राजस्थानी लोक कलाकार भी फेस्टिवल में अपनी रंगारंग प्रस्तुति देकर सैलानियों को मंत्रमुग्ध करते नजर आए। पर्यटन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर उपेंद्र सिंह शेखावत के मुताबिक पर्यटन विभाग की ओर से काईट फेस्टिवल का आयोजन किया गया। जिसमें पर्यटकों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं के साथ पतंगबाजी रखी गई। महोत्सव को लेकर देसी-विदेशी पर्यटकों का उत्साह देखते ही बन रहा था। पतंगोत्सव में जलमहल की पाल पर राजस्थानी लोकरंग भी बिखरे, वहीं सैलानियों में पतंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की होड़ सी नजर आई। उन्होंने तिल के लड्डू और फीणी का भी लुत्फ उठाया। दरअसल कोरोना के तीन साल बाद पतंग महोत्सव होने से देसी-विदेशी पर्यटकों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। पतंग उड़ाने के लिए विभाग की ओर से पतंग और डोर की भी उपलब्ध कराया गया। पर्यटन विभाग की ओर से पतंगबाजी को लेकर प्रतियोगिता भी कराई गई। पतंग प्रतियोगिता के साथ फैंसी पतंग उड़ाने की भी होड देखी गई। इस प्रतियोगिता में सबसे लंबी पतंग उड़ाने और पतंग काटने पर विभाग की ओर से सम्मानित भी किया जाता है।पतंग महोत्सव में पर्यटन विभाग की ओर से फैंसी पतगों की प्रदर्शनी लगाई गई, जो आकर्षक का केन्द्र रही। पर्यटन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर उपेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि विभिन्न फेस्टिवल के आयोजन का मुख्य उद्देश्य है कि राजस्थान में पर्यटन को बढ़ावा मिले। इसके अंतर्गत पर्यटन विभाग की ओर से दिसंबर, जनवरी, फरवरी और मार्च में विभिन्न पर्यटन फेस्टिवल आयोजित किए जाते हैं। इससे जयपुर सहित प्रदेश में पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलता है।

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