टूटते परिवारों के दर्द की कहानी बयां की जीवन संध्या ने।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
आधुनिक समाज के टूटते हुए परिवारों और जीवन की संध्या में अकेले जीने को मजबूर बुजुर्ग माता-पिता के दर्द की तस्वीर को कलाकारों ने ऐसा जिया कि दर्शक सोचने पर मजबूर हो गए। राजस्थान संगीत नाटक अकादमी एवं रविंद्र मंच सोसायटी के संयुक्त तत्वाधान में ज्योति कला संस्थान के सहयोग से आयोजित 3 दिवसीय एस वासुदेव स्मृति नाट्य समारोह में जीवन संध्या नाटक का सशक्त मंचन किया गया। तीन दिवसीय नाट्य समारोह का उद्घाटन कला एवं संस्कृति मंत्री डॉक्टर बी डी कल्ला ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उपस्थित राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष बीना जैस मालू, उपाध्यक्ष अनीता ऑडियो अतिथि श्रीचंद खेतानी अध्यक्ष पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत और विशिष्ट अतिथि हरगुन दास नेभनानी अध्यक्ष सिंधु वेलफेयर सोसाइटी छबल दास नवलानी अध्यक्ष चेटीचंड मेला समिति भी उपस्थित थे। अकादमी अध्यक्ष ने बताया कि अकादमी द्वारा कलाकार रजिस्ट्रेशन के लिए एक पोर्टल तैयार किया गया है जिस पर कलाकार अधिक से अधिक रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।तीन दिवसीय नाट्य समारोह के प्रथम दिन  पी वी चांद द्वारा लिखित और स्व सुरेश सिंधु द्वारा रूपांतरित और निर्देशित एवं नाटक संयोजन हेमा चंदानी द्वारा नाटक जीवन संध्या का सशक्त मंचन किया गया। जीवन संध्या नाटक की कहानी आधुनिक समाज के एक ऐसे बुजुर्ग तबके के दर्द को बयान करती है जिन्होंने अपने बच्चों को सिर्फ ऊंची तालीम हासिल करने के लिए न जाने कितनी तकलीफ उठा कर विदेश भेजा। लेकिन विदेश जाने के बाद उनके बच्चे विदेशी लड़की से शादी कर विदेश के होकर रह गए। अपने मां-बाप को भूल गए जिन बेटों को बुढ़ापे में माता-पिता का सहारा बनना चाहिए था उन्हें बेसहारा कर अपने जीवन का आनंद लेने में मजबूर हो गए। मां ममता पिता का प्यार सब कुछ भुला कर पश्चिमी जीवन की रंगीनियों में रंग गए। नाटक में रामचंद्र की भूमिका में वासुदेव मोटवानी और जानकी की भूमिका में नंदिनी पंजवानी ने अपने भावपूर्ण अभिनय से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। नाटक में विवेक माथुर हेमा चंदानी और मनोज आडवाणी ने अपने पात्रों को जीवंत कर अपने अभिनय की छाप छोड़ी। नाटक में मंच व्यवस्था मनोज स्वामी और अंकित शर्मा नोनू की रही। प्रकाश व्यवस्था राजेंद्र राजू और शहजोर अली की रही। संगीत संयोजन ओम प्रकाश सैनी का रहा।

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