पेपर लीक मामले पर हंगामे के भेंट चढ़ी विधानसभा की कार्यवाही।

जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को पेपर लीक के मामले में प्रतिपक्ष ने सरकार के वक्तव्य का विरोध किया। प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया ने स्पष्ट तौर पर कहा कि पेपर लीक के मामले में सरकार स्पष्ट रूप से जवाब नहीं दे पाई है और इस मामले को आरोप-प्रत्यारोप लगाकर बदनाम किया जा रहा है। प्रतिपक्ष ने सरकार के जवाब पर असंतोष जाहिर करते हुए वाकआउट कर दिया। सदन में हंगामे की स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। 10 मिनट बाद कार्रवाई फिर से शुरू हुई संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने पेपर लीक की जांच सीबीआई से कराने की मांग से इंकार कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने प्रतिपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि राजस्थान में पेपर लीक के मामले में बने कानून के बाद 7 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। 4 प्रकरणों में न्यायालय में  चालान पेश कर दिए गए हैं। न्यायालय में मामले विचाराधीन है अभी किसी को सजा नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि रीट पेपर लीक के मामले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि वह अपने निगरानी में इसकी जांच कराएंगे सीबीआई जांच की कोई जरूरत नहीं है। 102 लोगों को गिरफ्तार किया गया था 20 लाख रूपये जप्त भी किए गए थे। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि न्यायालय के निर्देश पर अवैध निर्माण के तहत अधिगम कोचिंग संस्थान के भवन को तोड़ा गया है। इसमें सरकार का कोई लेना देना नहीं है। विधानसभा में मंगलवार को शिक्षा मंत्री डॉ. बी डी कल्ला ने पेपर लीक मामले में सरकार की ओर से वक्तव्य देते हुए कहा कि 182 परीक्षाएं आयोजित की गई है इसमें से 145 में नियुक्ति दी गई है। आरपीएससी के माध्यम से 57 परीक्षाएं आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 से 18 के बीच आरएएस और एलडीसी की परीक्षा  के पेपर लीक हुए लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, पंजाब हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, यूपी एमपी और झारखंड के साथ सेना भर्ती के पेपर भी लीक हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि देश में नकल माफिया बन गया है उसे रोके जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 10 करोड़ 12 लाख रुपए की संपत्ति जप्त की है 4 शिक्षकों को बर्खास्त किया गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस मामले में और सख्त कानून बनाया जाना चाहिए। प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया ने स्पष्ट तौर पर कहा कि आरोप-प्रत्यारोप लगाने से काम नहीं चलेगा। बल्कि सरकार को यह बताना चाहिए था कि पेपर लीक के मामले में कौन-कौन लोगों को पकड़ा गया है और क्या क्या कार्रवाई की गई है। तथ्यों को छिपाया जा रहा है इससे युवाओं में रोष है। उन्होंने कहा कि सरकार को विधानसभा के कमेटी बनाकर परीक्षाओं में सुधार के लिए काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सेकंड ग्रेड पेपर लीक के मामले में एक गरीब बच्चे ने जो कि 5 लाख रूपये की राशि नहीं दे सकता था उसने एसपी उदयपुर को इस मामले की जानकारी दी गई थी। उदयपुर एसपी ने निश्चित तौर पर समय रहते हुए कार्रवाई कर इस मामले को उजागर किया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे किसी की भी हो लेकिन मामला बहुत गंभीर है ऐसे में इसे गंभीर समस्या मानकर इसका समाधान ढूंढा जाना चाहिए। भाजपा विधायक दल के उप नेता विधायक राजेंद्र राठौड़ ने आरोप लगाते हुए कहा कि सेकंड ग्रेड शिक्षक पेपर लीक मामले में सुरेश ढाका और भूपेंद्र सारण अन्य आरोपियों ने  ₹
10-10 लाख में पेपर बेचे हैं। उन्होंने कहा कि  रीट पेपर लीक के मामले में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ डीपी जारोलिया और कोऑर्डिनेटर प्रदीप पाराशर को क्यों नहीं पकड़ा गया उन्होंने कहा कि मामले को दबाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि विप्र बोर्ड की उपाध्यक्ष मंजू शर्मा के पुत्र धीरज शर्मा को पेपर लीक के मामले में पकड़ा गया था। लेकिन उसके स्कूल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कॉन्स्टेबल के पेपर लीक के मामले में आज तक उदाराम की संपत्ति को नहीं जप्त किया गया है। इस मामले में भाजपा के कालीचरण सराफ, मदन दिलावर अनिता भदेल और बलराम पुनिया ने भी सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि इसकी जांच निष्पक्ष की जानी चाहिए। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नारायण बेनीवाल ने कहा कि परीक्षाएं निजी संस्थाओं में कराए जाने की व्यवस्था में परिवर्तन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जहां चाहे भले एसओजी करें उसमें किसी का कोई लेना देना नहीं। जांच निष्पक्ष की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सीबीआई से जांच कराना चाहती है तो राज्यपाल को क्यों नहीं पत्र दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर न्याय नहीं मिला तो हम कोर्ट में जाकर इसकी जांच सीबीआई से कराने की निवेदन करेंगे। निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने कहा कि केंद्र केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्यों में भी कई परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। उन्होंने सवाल खड़े करते हुए कहा कि आरपीएससी और अधिनस्थ बोर्ड में योग्य व्यक्तियों को नियुक्ति दी जानी चाहिए जिससे की व्यवस्थाओं में सुधार किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि मौजूदा स्थिति में दोनों संस्थाओं में जो नियुक्तियां की गई है वह ठीक नहीं है।

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